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चाइल्ड केयर सेंटर

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चाइल्ड केयर सेंटर एक ऐसा केन्द्र है जहाँ पर मानसिक रूप से विकलांग बच्चो को पढाया जाता हैं और उन्हें ट्रेनिंग भी दी जाते हैं। इस सेंटर की स्पेशल एज्युकेटर ,नसीम फातिम का कहना है की इन बच्चो के साथ बहुत ही प्यार से पेश आना होता है और इन पर दुसरे बच्चो से ज्यादा ध्यान देना पड़ता हैं।
इस सेंटर में इन बच्चो को मानसिक विकार से लड़ने के साथ साथ व्यापारिक ट्रेनिंग भी दी जाती हैं। यहाँ पर उन्हें मोमबत्ती बनाना , ग्रीटिंग बनाना,और लिफाफे बनाना सिखाया जाता हैं। इन बच्चो में अलग -अलग विकलांगता हैं परन्तु इस सेंटर में इन सभी का उनकी विकलांगता से ध्यान हटाकर उनकी योग्यता पर ज्यादा ध्यान दिलाया जाता हैं। इन बच्चो के लिए यहाँ पर मनोचित्सिक को भी बुलाया जाता हैं।


सुबह की शुरुआत : बच्चो को व्यायाम कराते स्पेशल ओलंपियन ।

खेल-खेल में ध्यान लगना : मोटी की माला बनती हुई छात्रा ।

नन्हा चित्रकार : चित्र में रंग भरता छात्र ।

पढ़ने का खास तरीका : गिनती सीखता छात्र ।

देशभक्ति : तिरंगे को निहारती आँखे।

-जयश्री

Cruising the Finnish cuisine

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By
Kunal Majumdar

Do you know that Finns make almost a dozen of types of berry pies? Blueberry, blackberry, raspberry, cloudberry, strawberry...the list goes on. Berry picking is a national hobby in Finland. It’s even there in the law. All Finnish citizens have a right to pick berries and mushrooms in all forest lands irrespective of the ownership! It is not just the pies. They love their fresh berries with whipped cream and berry fillings in their sweet buns.

Finnish food is all about taste and aroma. It has a distinct flavour of the northern nature combined with pure natural raw ingredients. One would find an influence of both the east and the west. Rye bread, quark, sour cream, blins (similar to crepe), buckwheat and Finnish beetroot salad (rosolli) have an eastern origin while salted fish, meat balls and sweet bread come from the west. Just like its foreign policy, Finnish food is pragmatic and practical.


The early summer brings perch (type of fish), new potatoes and rhubarb. August is the time for mushrooms, crayfish, roasted wild duck and fresh vegetables and roots. In the autumn the hunters go after game and it is the time for reindeer round up.

Typical daily meals consist of meat balls, minced meat in sauce, meat loaf, macaroni casserole, steaks, and broiler in various forms. Rye bread and potato are a must have in the Finnish diet.

Finland is a coffee drinking nation. They drink coffee with breakfast, after lunch and dinner, during break and meetings. Finns just need an excuse to have their cup of coffee. The only other beverage that could give a competition to coffee is beer. Though there are a wide variety of alcoholic beverages available in Finland, it has traditionally been a beer-drinking country. Beer is often drunk at mealtimes and at saunas. Berries are also used for producing alcohol-containing beverages. Popular raw ingredients are currants (type of berry), strawberries, raspberries and cloudberries. They say the most popular word in Finland is kipis (cheers in Finnish).


Plenty for the five senses: Finnish food table


Golden taste: Arctic Char (fish) dish


Berry berry everywhere: Sorbet with berry sauce


Yummiest piece of fish: Smoked salmon

Kitis (cheers in Finnish): Strawberry juice

हर साल होने वाला डीयू इलेक्शन, स्ट्रीट चिल्ड्रेन के लिए वरदान साबित होता है । इन्हे देखकर आप चोकिये मत ये किसी का प्रचार नही कर रहे हैं, इन्हे किसी की हार जीत से कोई मतलब नही , यह तो इनकी ज़िन्दगी का हिस्सा है । दिन भर पम्फ्लेट्स इकट्ठा करके , शाम को इन्हे बेच कर ये २००-३०० रु०तक कमाते है । इसमे भी ये अपने लिए खुशी के पल ढूढ़ ही लेते हैं इन आंखों में सपने और भी है ।

दोस्तों के साथ फुर्सत के पल

पहले पेट पूजा फिर काम दूजा

काम के साथ आराम जरुरी है

गार्गी निम्


















Delhi Rocks !

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By Marie Naudascher
Here is a radio feature about the Delhi based rock band, Half Step Down.
Interviews with Shiv Lumba the pianist and Karan Dutta the guitarist and backing vocals.




दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे 14वें दिल्ली पुस्तक मेले का उद्दघाटन 30 अगस्त को भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के द्वारा किया गया । इस बार यहाँ लगभग 299 प्रकाशकों ने हिस्सा लिया है । इसमें भारत सहित 7 देशों के प्रकाशक शामिल हैं । पाकिस्तान, चीन, अमेरिका और ईरान के पब्लिशर्स यहाँ अपनी किताबों के साथ आए हैं।


बच्चों और महिलाओं को विशेष स्थान

7 सितम्बर तक चलने वाले इस पुस्तक मेले के बारे में दिल्ली पुस्तक मेले के डायरेक्टर, शक्ति मलिक ने बताया, "इस बार यहाँ बच्चों की पुस्तकों से संबंधित प्रकाशकों और महिला लेखिकाओं को विशेष स्थान दिया गया है । इस पुस्तक मेले में 18 महिला लेखिकाओं की पुस्तकों को शामिल किया गया है । इनमें स्व। रजनी पनिका, विभा देवसरे, डॉ. कुसुम अंसल और महाश्वेतादेवी आदि की पुस्तकें शामिल है" । उन्होंने आगे कहा, "बच्चों की किताबें, साइन्स, इस्लाम, गणित और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें, मैगज़ीन, मैप्स, कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर इत्यादि को डिस्प्ले में रखा गया हैं" ।

हॉल न0 10 में स्टर्लिंग पब्लिशर्स बच्चों में किताबों के प्रति लगाव पैदा करने के लिए यहाँ कई कॉम्प्टीशन भी करवा रहा है । इसकी आयोजक सुनीता कपूर ने कहा, "यह कॉम्प्टीशन दिन में 3 से 5 के बीच होता है । इसमें शामिल सभी बच्चों के लिए प्राइज़ रखे गए हैं । हमारा मक़सद बच्चों की क्रिएटिविटी को बढ़ावा देना है । बच्चें यहाँ केवल किताबें खरीदने ही न आए बल्कि इनज्वॉय भी करें"।

तकनीकी का बोलबाला

दिल्ली पुस्तक मेले में इस बार टेक्नॉल्जी का काफी प्रभाव देखने को मिल रहा है । बच्चों की किताबें, टेबल, साइन्स के फॉर्मूले सब कुछ यहाँ एनिमेटेड फॉर्म में उपलब्ध हैं । इसकी खरीददारी के लिए बच्चे काफी संख्या में यहाँ आ रहे हैं । लोगों को अपने पसंद की बुक स्टॉल ढूँढ़ने में परेशानी न हो इसके लिए यहाँ 'कियोस्क' नाम की कम्प्यूर मशीन भी लगाई गई है। इसमें प्रकाशक कंपनी का नाम डालने पर आप उसकी स्थिति के बारे में जान सकते हैं । यहां पर टेबल की डीवीडी खरीदने आए सैकेण्ड क्लास में पढ़ने वाले सोमिल डाबर का कहना है कि इससे इन्हें टेबल आसानी से याद हो जाता है ।

दोस्ती बहल करने का ज़रिया किताबें

पाकिस्तान 1988 से लगातार दिल्ली पुस्तक मेले में शामिल हो रहा है । पाकिस्तान के 'नेशनल बुक फांउडेशन' के साथ आए शौकत अली का कहना है, "हमारे स्टॉल पर लोग काफी संख्या में आ रहे हैं । इसके लिए मैं हिन्दुस्तान के लोगों का शुक्रिया अद़ा करना चाहूँगा । हम यहाँ उर्दू और अंग्रेजी की लगभग 2000 किताबों के साथ आए हैं । इतिहास पर 'हिस्ट्री ऑफ राजपूत' नाम की किताब यहाँ काफी बिक रही है । यहां के लोग किताब पढ़ने के काफी शौकीन हैं । किताबें दो देशों के बाच दोस्ती बहाल करने में काफी मददगार साबित हो सकती हैं" । इन्होंने दो देशों के बीच दोस्ती बहाल करने में मीडिया की भी काफी प्रशंसा की ।

इन्टरनेट बनाम किताबें


लेकिन पिछली बार के मुकाबले इस बार यहाँ भीड़ कम देखने को मिल रही है । दिल्ली बुक फेयर के डायरेक्टर, शक्ति मलिक ने इसके बारे में कहा, "यह सच है कि इस बार लोग कम आ रहे हैं । इसके लिए 'इंडियन ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन', (आईटीपीओ) जिम्मेदार है। क्योंकि इस बार इन्होंने इसके एडवरटीजमेंट पर काफी कम ध्यान दिया है" । बिहार से यहाँ किताबों की खरीददारी करने आए दीपक श्रीवास्तव का कहना है, "इंटरनेट और टी.वी के चलन से लोगों का रूझान किताबों की तरफ कम हो रहा है । अब ज्य़ादातर किताबें इंटरनेट पर भी उपलब्ध होती हैं और लोग वहीं से काफी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं । हार्ड कॉपी खरीदने की ज़हमत वे नहीं उठाना चाहते हैं । लोगों के पास किताबें पढ़ने के लिए समय भी नहीं है" । लेकिन दिल्ली के सुयश बत्रा के अनुसार इंटरनेट ने लोगों को किताबों के बारे में जानकारी प्राप्त करने में काफी मदद की है । यह एक तरह से लोगों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित ही करता है । किताबों की जगह कोई नहीं ले सकता है।

अगर आप अपनी मनपसंद की किताब के लिए कई बुक शॉप्स के चक्कर लगा चुके हैं और निराश हैं, तो यहाँ एक बार ज़रूर आइए । हो सकता है कि आप यहाँ निराश न हो । और हाँ अपने साथ बच्चों को लाना मत भूलिएगा । क्योंकि उनके लिए भी यहाँ है बहुत कुछ ।

लेख : रमाशंकर पाण्डेय एंव जयश्री
चित्र : जयश्री